डेस्क। Iran और इजरायल के बीच जारी सीधे संघर्ष ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। भारत इस पूरे विवाद में अपनी ‘सामरिक स्वायत्तता’ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की बर्बादी का भारत पर सीधा और भयावह असर पड़ सकता है। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर चाबहार बंदरगाह के भविष्य तक भारत के अरबों डॉलर दांव पर लगे हैं।
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भारत अपनी जरूरत का 70% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से तेल लेना कम कर दिया है लेकिन ईरान की भौगोलिक स्थिति पूरी दुनिया की तेल सप्लाई को नियंत्रित करती है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जिस पर ईरान का नियंत्रण है।
फिलहाल युद्ध के कारण इस रास्ते पर जहाजों का ट्रैफिक जाम है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100-120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की उम्मीद है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बेकाबू हो जाएगी।

ईरान में भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक निवेश ‘चाबहार बंदरगाह’ है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का मुकाबला करने और अफगानिस्तान समेत मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए भारत ने इसे विकसित किया है। 2024 में भारत ने इसके संचालन के लिए 10 साल का दीर्घकालिक समझौता भी किया है। यदि ईरान युद्ध में बर्बाद होता है, तो भारत का यह गेटवे बंद हो जाएगा। इससे न केवल भारत का अरबों का निवेश डूब जाएगा बल्कि रूस तक जाने वाला ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) भी ठप पड़ जाएगा।
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