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Wednesday, April 22, 2026

कैसे पड़ा ईरान के गलियारे का नाम होर्मुज, इस प्राचीन देवता से है कनेक्शन

डेस्क। दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री धमनियों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ इन दिनों सुर्खियों में है। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति का सबसे बड़ा जरिया होने के कारण यह हमेशा भू-राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे हजारों साल पुराना एक गहरा आध्यात्मिक इतिहास है?

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इस समुद्री रास्ते का नाम Iran के प्राचीन देवता ‘अहुर मज्दा’ से जुड़ा है, जो प्रकाश, सत्य और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं। यह नाम समय के साथ विकसित हुआ और अंततः होर्मुज के रूप में स्थापित हो गया।पारसी धर्म के सर्वोच्च देवता अहुर मज्दा को इस पूरे क्षेत्र का रक्षक माना जाता था। प्राचीन काल में, इस रास्ते से गुजरने वाले नाविक और व्यापारी अक्सर अपने सुरक्षित सफर के लिए इसी सर्वोच्च शक्ति का स्मरण करते थे, जिससे यह नाम इस गलियारे की पहचान बन गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम इस बात का प्रमाण है कि ईरान की पहचान केवल आज के आधुनिक या इस्लामिक परिवेश तक सीमित नहीं है।पारसी धर्म, जो आज भी भारत में पारसी समुदाय के रूप में जीवित है, कभी पूरे ईरानी भू-भाग की आत्मा था। यह गलियारा आज बेशक तेल की राजनीति के कारण चर्चा में रहता है, लेकिन इसका नाम उस संस्कृति को याद दिलाता है जो हजारों वर्षों से ज्ञान, प्रकाश और नैतिकता पर टिकी थी।

इसका नाम इस गलियारे को एक अलग गंभीरता देता है। चाहे ईरान का मौजूदा राजनीतिक रुख जो भी हो, लेकिन होर्मुज का यह नाम हमेशा उस महान सभ्यता की याद दिलाता रहेगा जिसने दुनिया को सत्य, प्रकाश और न्याय का पहला बड़ा संदेश दिया था। इतिहास की यह गूंज आज भी समुद्र की लहरों में सुनाई देती है।

Tag: #nextindiatimes #Iran #StraitOfHormuz

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