डेस्क। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ (flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में एक सनसनीखेज घटना सामने आई। उड़ान के दौरान विमान के ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट के भीतर अचानक हमला कर दिया। इस हाथापाई के कारण विमान अचानक लगभग 5,200 मीटर नीचे आ गया। हालांकि, चालक दल के सदस्यों और यात्रियों ने तुरंत बहादुरी और सूझबूझ का परिचय देते हुए हमलावर को दबोच लिया और विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई।
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इस डरावने हादसे के बाद ओमान (OMAN) और इजराइल के बीच के संवेदनशील और गोपनीय संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आइए जानते हैं दोनों देशों के रिश्तों का इतिहास और उनका वर्तमान स्वरूप।
1. अनौपचारिक शुरुआत: गुप्त सैन्य और खुफिया मदद
ओमान और इजराइल के बीच कभी औपचारिक रूप से राजदूतों का आदान-प्रदान या दूतावासों की स्थापना नहीं हुई। हालांकि, दोनों के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत आधी सदी पुरानी है।
- 1970 का दशक:
- ओमान के सुल्तान को धोफार क्षेत्र में मार्क्सवादी विद्रोहियों से अपनी सत्ता बचाने के लिए कड़ी चुनौती मिल रही थी।
- गोपनीय संपर्क: मस्कट (ओमान) ने अपनी स्थिरता के लिए गुप्त रूप से इजराइल से सैन्य परामर्श और खुफिया जानकारी प्राप्त की।
- ब्रिटेन की मध्यस्थता: उस समय पूरे अरब जगत में इजराइल का कड़ा विरोध था, इसलिए ओमान ने ब्रिटेन के माध्यम से इन संपर्कों को पूरी तरह गोपनीय रखा।
2. ओस्लो समझौता और व्यापारिक कार्यालय
1990 के दशक में जब इजराइल और फलस्तीन के बीच ऐतिहासिक ‘ओस्लो शांति समझौता’ हुआ,
तब ओमान ने इजराइल के साथ संबंधों को थोड़ा सार्वजनिक किया।
- व्यापारिक कार्यालय:
- मस्कट ने अपनी जमीन पर एक इजरायली व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का दफ्तर खोलने की अनुमति दी,
- जिससे दोनों में वाणिज्यिक बातचीत शुरू हुई।
- दफ्तर की बंदी:
- बाद के वर्षों में वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में हिंसा भड़कने पर जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ओमान को यह कार्यालय बंद करना पड़ा।
- कंटिन्यूटी:
- दफ्तर बंद होने के बाद भी मस्कट ने कूटनीतिक संवाद के दरवाजे पूरी तरह कभी बंद नहीं किए।
3. नेतन्याहू की मस्कट यात्रा और एयरस्पेस का फैसला
साल 2018 में दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला।
- पीएम नेतन्याहू का दौरा:
- बिना किसी औपचारिक राजनयिक रिश्ते के, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अचानक ओमान का दौरा किया और सुल्तान काबूस बिन सैद से मुलाकात की।
- एयरस्पेस की मंजूरी (फरवरी 2023):
- इस ऐतिहासिक मुलाकात के असर से ओमान ने इजरायली नागरिक उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) खोलने का आधिकारिक फैसला लिया। इससे इजराइल से एशिया जाने वाली उड़ानों का समय और ईंधन दोनों घटने लगे।
4. अब्राहम एकॉर्ड्स से दूरी और गाजा युद्ध का असर
साल 2020 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने ‘अब्राहम समझौते’ के तहत इजराइल के साथ पूर्ण संबंध बनाए।
ओमान ने इस कदम की सराहना तो की, लेकिन खुद को इससे अलग रखा।
ओमान की स्पष्ट विदेश नीति रही है कि जब तक एक स्वतंत्र और न्यायसंगत फलस्तीन राज्य का निर्माण नहीं होता, तब तक वह इजराइल को पूर्ण आधिकारिक मान्यता नहीं देगा। अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में शुरू हुए सैन्य अभियानों के बाद से ओमान ने इजराइली कार्रवाइयों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़े शब्दों में आलोचना की है,
जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
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