हड्डियों को खोखला बना रही 9 घंटे की डेस्क जॉब, इन बातों का रखें ध्यान

हेल्थ डेस्क। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह उठकर ऑफिस जाना, लगातार 8 से 9 घंटे कुर्सी पर बैठे रहना, घर लौटकर सोफे पर सुस्ताना और फिर सो जाना—ज्यादातर लोगों का डेली रूटीन बन चुका है। ऑफिस में हमारा दिमाग भले ही एक्टिव रहता है लेकिन हमारी मांसपेशियों और हड्डियों (bones) को जो फिजिकल स्टिमुलेशन चाहिए, वह बिल्कुल नहीं मिल पाता।

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हमारी हड्डियां लंबे समय तक एक ही जगह इन-एक्टिव रहने के लिए नहीं बनी हैं। हड्डियां एक लिविंग स्ट्रक्चर हैं, जो शरीर पर पड़ने वाले दबाव के हिसाब से खुद को ढालती हैं। इसीलिए, फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण हड्डियां अंदर से कमजोर होने लगती हैं।

हड्डियों को मजबूत रखने का खास नियम: क्या है बोन रिमॉडलिंग?

जब आप पैदल चलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज करते हैं, तो आपकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इस बायोलॉजिकल प्रोसेस को बोन रिमॉडलिंग कहा जाता है। इसमें हड्डियों के पुराने टिश्यूज हटते हैं और नए मजबूत टिश्यूज बनते हैं।

लेकिन लगातार बैठे रहने से यह प्रोसेस काफी धीमी हो जाती है। यहां यह समझना जरूरी है कि सिर्फ बैठे रहने से ऑस्टियोपोरोसिस नहीं होता, बल्कि लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी की जगह दिन भर कुर्सी पर समय बिताना असल समस्या है।

मांसपेशियां देती हैं पहली चेतावनी: इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर एक साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि हड्डियों का लॉस बिना किसी दर्द के होता रहता है।

हालांकि, हमारी मांसपेशियां कमजोर होने का संकेत पहले ही देने लगती हैं।

  • थकान: सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना।
  • खड़े रहने में तकलीफ: ज्यादा देर तक एक जगह खड़े होने में दिक्कत होना।
  • पीठ में दर्द: लंबे काम के दिन के बाद पीठ के निचले हिस्से में दर्द या जकड़न महसूस होना।

जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो शरीर का बैलेंस बिगड़ता है और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कमजोर हड्डियों वाले व्यक्ति के लिए हल्का सा गिरना भी गंभीर फ्रैक्चर का कारण बन सकता है।

30 की उम्र में तय होती है 70 की उम्र की चाल:

ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद या बुढ़ापे में हड्डियों की सेहत पर ध्यान देते हैं, लेकिन हमारे शरीर का पीक बोन मास एडल्टहुड की शुरुआत (30 की उम्र) तक ही हासिल हो पाता है।

घंटों बैठकर काम करने की आदत के साथ कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न करना हड्डियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। भारत में यह समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए, 30 की उम्र की आपकी आदतें ही आपके भविष्य की बोन हेल्थ तय करती हैं।

क्या सिर्फ 1 घंटे का जिम काफी है?

अगर आप रोज 45 मिनट वर्कआउट करते हैं, लेकिन बाकी के 10 घंटे लगातार बैठे रहते हैं, तो भी आपको बीच-बीच में वॉक करने की जरूरत है। शॉर्ट वॉकिंग ब्रेक्स आपको फिजिकल इन-एक्टिविटी से ब्रेक देते हैं, लेकिन हड्डियों और मांसपेशियों को असल में मजबूत बनाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सबसे जरूरी है।

लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी बदलाव:

  1. काम के बीच मूवमेंट:
  2. हर 30 से 60 मिनट में कुर्सी से खड़े हों।
  3. फोन पर बात करते समय टहलें या लंच के बाद थोड़ी देर जरूर चलें।
  4. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग अपनाएं:
  5. पैदल चलना दिल के लिए अच्छा है,
  6. लेकिन मसल्स और हड्डियों को मजबूत करने के लिए स्क्वैट्स, वेट लिफ्टिंग या रेजिस्टेंस बैंड्स का इस्तेमाल करें।
  7. पोश्चर का रखें ध्यान:
  8. सही कुर्सी का इस्तेमाल करें, बैठने का पोश्चर सही रखें और कोर मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने वाली एक्सरसाइज करें।
  9. सही डाइट और न्यूट्रिशन:
  10. अपनी डाइट में कैल्शियम, विटामिन-डी और भरपूर मात्रा में प्रोटीन शामिल करें।
  11. बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेने के बजाय नेचुरल डाइट पर ध्यान दें।
  12. नियमित बोन डेंसिटी टेस्ट:
  13. मेनोपॉज के बाद महिलाओं, बुजुर्गों और क्रॉनिक बीमारियों वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह पर रेगुलर बोन-डेंसिटी टेस्ट (DEXA स्कैन) करवाना चाहिए।

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