सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक बेहद दुखद और शर्मनाक मामला सामने आया है। यह घटना मानवता को झकझोरने वाली है। यहां एक बेसहारा विधवा महिला (widow) को सच का साथ देने और अपनी इज्जत बचाने की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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झूठी गवाही से इंकार पर छिनी रोजी-रोटी:
पूरा मामला सिद्धार्थनगर जिले के नगर पंचायत बिस्कोहर का है। पीड़ित महिला पिछले छह वर्षों से यहां आउटसोर्सिंग सफाई कर्मी के रूप में काम कर रही थी। महिला का आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष अजय गुप्ता ने उस पर एक मामले में झूठी गवाही देने का दबाव बनाया। यह गवाही तत्कालीन थानाध्यक्ष और एक पुलिसकर्मी के खिलाफ दी जानी थी। जब महिला ने झूठी गवाही देने से साफ इंकार कर दिया, तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
घर में घुसकर छेड़छाड़ और दबाव बनाने का आरोप:
पीड़िता ने नगर पंचायत अध्यक्ष पर एक और बेहद गंभीर आरोप लगाया है। महिला के अनुसार, एक रात नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता उसके घर पहुंच गए। उन्होंने महिला पर गलत नीयत से दबाव बनाया और उसके साथ छेड़छाड़ की। महिला ने जब अपनी अस्मिता से समझौता करने से मना कर दिया,
तो उसे तरह-तरह से परेशान किया जाने लगा।

बच्चों के साथ भटकने को मजबूर, एसपी से न्याय की गुहार:
अध्यक्ष के राजनीतिक प्रभाव और रसूख के कारण अब तक इस मामले में कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। पति की मौत के बाद यह महिला अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है।
उसके पास अब कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है।
पीड़िता ने न्याय पाने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में गुहार लगाई है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस बेसहारा महिला को कब तक न्याय दिला पाता है।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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