नई दिल्ली। संसद के गलियारों में शुक्रवार का दिन एक बड़े सियासी उलटफेर का गवाह बना। मोदी सरकार के लिए पिछले 12 सालों में यह पहला मौका था, जब लोकसभा में कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक गिर गया। आइए जानें कि पहली बार इसे कब लाया गया था और तब से अब तक यह कितनी बार खारिज हुआ?
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Women Reservation Bill का सफर आज का नहीं बल्कि 30 साल पुराना है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि पहली बार यह बिल 12 सितंबर 1996 को एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान संसद में पेश किया गया था। तब से लेकर आज तक यह मुद्दा सत्ता के गलियारों में बहस का केंद्र रहा है। 1996 में जब इसे 81वें संविधान संशोधन के तौर पर लाया गया था और 11वीं लोकसभा भंग होने के कारण यह बिल आगे नहीं बढ़ सका था।

1996 के बाद यह बिल बार-बार सदन में आया और बार-बार खारिज होता रहा। साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन के रूप में इसे पेश किया लेकिन सहमति के अभाव में यह ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद 1999 में दोबारा प्रयास हुआ, फिर 2003 और 2004 में भी इसे लाने की कोशिश की गई लेकिन हर बार परिणाम वही रहा।
साल 2008-2010 के बीच का समय इस बिल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मई 2004 में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में इसे प्राथमिकता दी थी। साल 2008 में इसे राज्यसभा में पेश कर स्थायी समिति के पास भेजा गया। अंततः 9 मार्च 2010 को भारी हंगामे के बीच राज्यसभा में यह बिल पारित हो गया।
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