नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज की वोटिंग होने वाली है। आइये जानते हैं कि आखिर आदर्श आचार संहिता (Code of Conduct) आखिर कब हटती है और इसके हटने के बाद क्या बदलाव देखने को मिलते हैं? चुनाव आयोग के कड़े नियमों के बीच यह संहिता न केवल राजनीतिक दलों की गतिविधियों को नियंत्रित करती है, बल्कि आम जनता और प्रशासन पर भी प्रभाव डालती है।
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चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करता है। उसी दिन से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इसे राजनीतिक दलों की सहमति से तैयार किए गए सिद्धांत और मानक माना जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह किसी कानून के तहत नहीं बनाई गई है, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक समझौते पर आधारित है।

जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पूरी होती है और वोटिंग समाप्त होती है, आचार संहिता हटा दी जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि अब नई भर्तियों और परीक्षाओं का आयोजन संभव है। शराब के ठेकों की नीलामी फिर से शुरू हो सकती है। सरकार अपनी योजनाओं की घोषणा कर सकती है। अधिकारी अपने पदों पर सामान्य प्रशासनिक निर्णय ले सकते हैं और जनसभाएं भी बिना समय सीमा के आयोजित की जा सकती हैं।
जो पाबंदियां चुनाव के दौरान लागू थीं, वे हट जाती हैं और प्रशासनिक गतिविधियों पर पुनः सामान्य नियम लागू हो जाते हैं। आचार संहिता एक तरह से चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने का प्रयास है। यह न केवल राजनीतिक दलों को बल्कि प्रशासन और मीडिया को भी नियंत्रित करती है। आचार संहिता हटते ही राजनीतिक गतिविधियों और सरकारी कामकाज में तेजी देखने को मिलती है।
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