डेस्क। ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक आयात पर निर्भर है, इसलिए खाड़ी देशों की हर हलचल हमें प्रभावित करती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस LPG, CNG और PNG की चर्चा आज हर घर में है, वे एक-दूसरे से कितनी अलग हैं और इनका काम क्या होता है?
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LPG:
एलपीजी वह ईंधन है जिससे भारत के करोड़ों घरों में चूल्हा जलता है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी हाइड्रोकार्बन गैसों का मिश्रण होती है। जब रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ किया जाता है, तब उप-उत्पाद के रूप में यह गैस निकलती है। इसे भारी दबाव के जरिए लिक्विड रूप में बदला जा सकता है, जिससे इसे छोटे और बड़े सिलेंडरों में भरकर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना आसान हो जाता है।
PNG:
पीएनजी का पूरा नाम पाइप्ड नेचुरल गैस है। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह गैस पाइपों के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के घर या कारखानों तक पहुंचाई जाती है। इसमें मीथेन की मात्रा अधिक होती है और यह हवा से हल्की होती है। यह आपके घर में लगे मीटर के आधार पर काम करती है, जिसका बिल बिजली के बिल की तरह बाद में आता है।

CNG:
सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाने के लिए सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस एक वरदान साबित हुई है। यह प्राकृतिक गैस का ही एक रूप है जिसे बहुत ऊंचे दबाव पर कंप्रेस किया जाता है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी न केवल सस्ती पड़ती है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन भी काफी कम होता है। इसीलिए इसे ‘क्लीन फ्यूल’ या स्वच्छ ईंधन कहा जाता है।
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