डेस्क। इस्लामी कैलेंडर का सबसे मुकद्दस महीना रमजान (Ramadan) दस्तक दे चुका है। चांद के दीदार के साथ ही दुनिया भर के मुसलमान रोजे की शुरुआत कर चुके हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में भी गुरुवार को पहला रोजा रखा जाएगा। अरब मुल्क, पश्चिम एशिया सहित यूरोपीय देशों में बुधवार को पहला रोजा रखा गया।
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इस्लाम धर्म में माना जाता है कि इसी पवित्र महीने में अल्लाह ने हजरत मुहम्मद पर पवित्र किताब कुरान शरीफ का अवतरण किया था। रमजान को सब्र, संयम, आत्म शुद्धि और इंसानियत का महीना कहा जाता है। इस दौरान मुसलमान सूर्योदय से पहले से लेकर सूर्यास्त तक बिना खाए-पीए रोजा रखते हैं।
सहरी:
सहरी वह भोजन होता है जो रोजेदार सूरज निकलने से पहले करते हैं। सहरी का समय फज्र की अजान से पहले तक होता है, जिसे खाने के बाद रोजा शुरू हो जाता है। फिर इसके बाद न कुछ खाया जाता है और न ही पानी पिया जाता है।

इफ्तार:
इफ्तार वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है। इफ्तार मग़रिब की अजान के साथ किया जाता है। परंपरा के अनुसार खजूर और पानी से रोजा खोला जाता है। इसके बाद नमाज अदा की जाती है और फिर खाना खाया जाता है। इफ्तार सिर्फ रोजा खोलने का समय नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और मोहब्बत का प्रतीक भी है। कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन किया जाता है।
तरावीह की नमाज:
तरावीह खास नमाज है जो रमजान के महीने में ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। यह नमाज सिर्फ रमजान में अदा की जाती है। इसमें कुरान शरीफ की तिलावत की जाती है। तरावीह का मकसद अल्लाह की इबादत में ज्यादा समय देना और आत्मिक शांति पाना है।
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