मऊ। हिंदू धर्म में त्योहारों (Festivals) का विशेष महत्व है। खासकर शक्ति की उपासना के लिए नवरात्रि (Navratri) पर्व को बहुत महत्व बताया माना गया है। आज हम आपको बताएंगे उस मंदिर के बारे में जहां पर मां सीता ने लव-कुश (Luv-Kush) को जन्म दिया था। इस मंदिर का नाम है वनदेवी (Vandevi)।
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उत्तर प्रदेश में मऊ (Mau) जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर दक्षिण पश्चिम दिशा में जगत जननी सीता माता का मन्दिर वनदेवी (Vandevi) है। आज यह जगह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बिन्दु है। जनश्रुतियों एवं भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थान महर्षि वाल्मीकि की साधना स्थली के रूप में विख्यात रहा है। कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने ही माता सीता की पहचान को छुपाने के लिए उनका नाम वनदेवी (Vandevi) रख दिया था।

धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि इसी स्थान पर लवकुश का जन्म हुआ था। जब भगवान राम के आदेश पर लक्ष्मण जी ने वन में छोड़ा तब वो इसी स्थान पर महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहीं, जिन्हें वनदेवी कहा जाने लगा। वनदेवी मन्दिर (Vandevi) अनेक साधु-महात्मा और साधकों की तपस्थली भी रहा है। जनश्रुति के अनुसार नर्वर के रहने वाले सिधनुआ बाबा को स्वप्न दिखाई दिया कि देवी की प्रतिमा जंगल में जमीन के अनदर दबी पड़ी है। देवी ने बाबा को उक्त स्थल की खुदाई कर पूजा पाठ का निर्देश दिया।
स्वप्न के अनुसार बाबा ने निर्धारित स्थल पर खुदाई प्रारम्भ की तो उन्हें मूर्ति दिखाई दी। बाबा के फावड़े की चोट से मूर्ति क्षतिग्रस्त भी हो गयी। बाबा जीवन पर्यन्त वहाँ पूजन-अर्चन करते रहे। वृद्धावस्था में उन्होंने उक्त मूर्ति को अपने घर लाकर स्थापित करना चाहा लेकन वे सफल नहीं हुए और वहीं उनका प्राणांत हो गया। बाद में वहाँ मन्दिर बनवाया गया।
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