26.6 C
Lucknow
Friday, April 4, 2025

धरती से टकराया सौर तूफान, कई देशों की गुल हो सकती है बिजली

डेस्क। दो दशक का सबसे शक्तिशाली सौर तूफान (Solar storm) शुक्रवार को पृथ्वी से टकराया है। इसके चलते अमेरिका (America) से ब्रिटेन तक आसमान में चमकीला नजारा दिखा है। अमेरिका (America) के राष्ट्रीय समुद्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने इस मैग्नेटिक तूफान को जी5 श्रेणी का बताया है।

यह भी पढ़ें-दिल्ली में तूफान ने मचाई भारी तबाही, कई जगह गिरे पेड़, 2 की मौत 23 घायल

आपको बता दें कि भू-चुंबकीय तूफान (geomagnetic storms) को जी1 से जी5 के पैमाने पर मापा जाता है, जिसमें G5 को तूफान (Solar storm) का सबसे चरम स्तर माना जाता है। सूर्य के वायुमंडल से पांच विस्फोट शुक्रवार देर रात से आये और जिनके रविवार तक जारी रहने की भविष्यवाणी की गई है। तूफान (Solar storm) की असली ताकत पृथ्वी से टकराने से लगभग 60 से 90 मिनट पहले पता चलेगी क्योंकि सैटेलाइट (satellites) निकलने वाली ऊर्जा के विस्फोट को मापते हैं।

इस तरह के तूफान (Solar storm) पृथ्वी की कक्षा और ग्रह की सतह दोनों पर विभिन्न प्रणालियों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इससे संचार (communications), विद्युत पावर ग्रिड, नेविगेशन, रेडियो और उपग्रह संचालन में व्यवधान की संभावना रहती है। धरती पर इंसानों को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से सुरक्षा मिल जाता है। लेकिन, बिजली के ग्रिडों को खतरा रहता है, पाइपलाइनें करंट से चार्ज हो सकती हैं और अंतरिक्ष यान (spacecraft) अपने रास्ते से भटक सकते है।

गौरतलब है कि पिछली बार अक्टूबर 2003 में पृथ्वी पर G5 तूफ़ान (Solar storm) आया था- जो पैमाने पर सबसे भयानक था। इसके परिणामस्वरूप स्वीडन में बिजली गुल हो गई और दक्षिण अफ़्रीका में ट्रांसफार्मरों को नुकसान पहुंचा था। नासा (NASA) ने सौर तूफान (Solar storm) को लेकर गहन विश्लेषण के बाद कहा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सवार चालक दल के लिए कोई खतरा नहीं है।

Tag: #nextindiatimes #Solarstorm #NASA #satellites

RELATED ARTICLE

close button