नई दिल्ली। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (stock market) खुलते ही धड़ाम हो गया। रियल एस्टेट, फाइनेंशियल सर्विस और कंज्यूमर ड्यूरेबल स्टॉक तेजी से नीचे आ गए। वहीं रुपया (Rupee) भी इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर (dollar) के मुकाबले रुपया सोमवार को 86.27 रुपये पर पहुंच गया। अभी दो दिन पहले शुक्रवार को भी रुपया लाइफ टाइम लो पर पहुंच गया था।
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सुबह 9:20 बजे बीएसई 677.22 प्वाइंट और एनएसई 212.90 प्वाइंट टूट गया। यह गिरावट भारतीय मुद्रा के लिए चिंता का विषय है और अर्थव्यवस्था पर कई तरह के असर डाल सकती है। खबरें हैं कि गैर-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजार में रुपया 86 का स्तर पार कर गया। रुपये (Rupee) की कमजोरी का प्रमुख कारण विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली है। जनवरी में अब तक उन्होंने ₹21,357 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 3 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $5.693 बिलियन घटकर $634.585 बिलियन रह गया। डॉलर की मांग बढ़ने से अमेरिकी मुद्रा मजबूत हो रही है। इसके पीछे नई अमेरिकी सरकार द्वारा संभावित व्यापार प्रतिबंधों की घोषणा की अटकलें हैं, जो 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद लागू हो सकती हैं।
इस गिरावट से घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक रुपये (Rupee) की स्थिति को स्थिर रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। रुपये (Rupee) की गिरावट के पीछे की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। कच्चे तेल के वायदा भाव 81.49 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
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