लाइफस्टाइल डेस्क। दिल्ली का AQI 500 पार पहुंच चुका है। यह सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि हेल्थ इमरजेंसी भी है, जिसका असर लोगों की सेहत पर नजर आ रहा है। घर से बाहर कदम रखते ही आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। ऐसे में बच्चों का खास ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि उनके फेफड़े अभी भी विकसित हो रहे होते हैं।
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बच्चों की इम्युनिटी भी कमजोर होती है, जिसके कारण उन पर Pollution का असर ज्यादा होता है। ऐसे में पेरेंट्स के लिए यह जानना जरूरी है कि खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण में शिशुओं और बच्चों की देखभाल कैसे करें। बाहर का प्रदूषण जब ज्यादा हो, तो सबसे पहला कदम है कि बच्चों को घर के अंदर रखें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, ताकि प्रदूषित हवा अंदर न आ सके।

एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, खासकर बच्चों के कमरे में। इसे नियमित रूप से साफ करना और फिल्टर बदलना न भूलें। प्राकृतिक एयर प्योरिफाइंग प्लांट्स, जैसे- एलोवेरा, स्पाइडर प्लांट, तुलसी आदि भी घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं। ज्यादा प्रदूषण में बच्चों को बाहर ले जाने से बचना चाहिए, खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है।
अगर बाहर जाना बेहद जरूरी हो, तो बच्चे को अच्छी क्वालिटी का N95 या N99 मास्क पहनाएं। ध्यान रखें कि मास्क बच्चे के चेहरे पर ठीक से फिट हो। बच्चे को बाहर से आने के बाद हाथ, मुंह और चेहरा अच्छी तरह धुलवाएं। प्रदूषण के कण शरीर और कपड़ों पर चिपक सकते हैं, इसलिए नियमित रूप से नहाना और साफ कपड़े पहनना जरूरी है।
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