डेस्क। कुछ लोग बीयर (beer) को हल्का नशा मानकर बेफिक्र रहते हैं तो कुछ स्ट्रांग बीयर के झटके को व्हिस्की से भी तेज बताते हैं लेकिन विज्ञान की भाषा में नशा इस पर निर्भर नहीं करता कि बोतल पर क्या लिखा है, बल्कि इस पर कि आपके शरीर में अल्कोहल की कितनी मात्रा जा रही है।
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बीयर और व्हिस्की के बीच का यह अंतर केवल स्वाद का नहीं, बल्कि रसायनिक सघनता और शरीर द्वारा उसे सोखने की गति का है, जिसे समझना सेहत के लिहाज से बेहद जरूरी है। किसी भी मादक पेय की ताकत को एल्कोहल बाय वॉल्यूम (ABV) से मापा जाता है। एक सामान्य लाइट बीयर में अल्कोहल की मात्रा लगभग 5% होती है, जबकि ‘स्ट्रांग बीयर’ में यह 7% से 9% के बीच रहती है।

इसके विपरीत, व्हिस्की एक डिस्टिल्ड स्पिरिट है, जिसमें अल्कोहल का स्तर आमतौर पर 40% या उससे अधिक होता है। तकनीकी रूप से देखें तो व्हिस्की की एक 750ml की बोतल में एक सामान्य बीयर के मुकाबले लगभग 16 गुना अधिक अल्कोहल होता है। हालांकि जब हम इसे सर्विंग के हिसाब से देखते हैं, तो गणित बदल जाता है। व्हिस्की का एक स्टैंडर्ड पेग (45ml) उतना ही शुद्ध अल्कोहल (लगभग 18ml) शरीर को देता है, जितना एक सामान्य बीयर की 330ml की बोतल देती है।
यदि आप स्ट्रांग बीयर की एक 500ml की बड़ी कैन (पाइनट) पीते हैं, जिसमें 8% अल्कोहल है, तो आप एक बार में लगभग 40ml शुद्ध अल्कोहल का सेवन कर रहे होते हैं। बीयर में कार्बोनेशन (गैस) होती है, इसलिए यह अल्कोहल को खून में तेजी से घोलने में मदद करती है। यही कारण है कि कई बार स्ट्रॉन्ग बीयर पीने वालों को नशा बहुत जल्दी और भारी महसूस होता है।
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