रांची। Jharkhand की स्वर्णरेखा नदी के किनारे रेत के नीचे से द्वितीय विश्व युद्ध काल के दो विशालकाय बम बरामद हुए। करीब 80 साल से भी ज्यादा समय से जमीन में दबे ये बम आज भी इतने शक्तिशाली थे कि एक छोटा शहर तबाह कर सकते थे। मिट्टी और बालू की परतों के नीचे छिपे ये जिंदा बम उस दौर की भीषण जंग की यादें भी ताजा कर रहे हैं।
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सेना के विशेषज्ञों ने जब इन बमों की जांच की, तो उन पर AN-M64 और Made in USA लिखा पाया गया। AN-M64 एक प्रसिद्ध अमेरिकी मिसाइल बम है, जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के लिए किया जाता था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये बम लगभग 80 वर्षों से नदी की रेत में दबे हुए थे।

इन बमों के आकार और वजन को देखते हुए यह साफ है कि इन्हें किसी लड़ाकू विमान से गिराने के लिए डिजाइन किया गया था लेकिन तकनीकी खराबी या बालू में गिरने के कारण ये उस समय फट नहीं पाए।द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह क्षेत्र किसी पुराने प्लेन क्रैश का गवाह रहा होगा। उस समय मित्र राष्ट्रों (अमेरिका और ब्रिटेन) के विमान बर्मा (म्यांमार) और चीन के मोर्चों पर जाने के लिए भारत के पूर्वी हिस्सों के हवाई अड्डों का इस्तेमाल करते थे।
संभव है कि किसी दुर्घटना के दौरान ये बम स्वर्णरेखा नदी में गिर गए हों और समय के साथ बालू की परतों के नीचे दफन हो गए।द्वितीय विश्व युद्ध मानव इतिहास का सबसे विनाशकारी संघर्ष था। मुख्य रूप से यूरोप, एशिया, अफ्रीका और अटलांटिक और प्रशांत महासागरों में लड़े गए इस युद्ध ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया था।
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