डेस्क। दुबई एयर शो 2025 के अंतिम दिन एक दुखद हादसा हुआ, जब भारतीय हल्के लड़ाकू विमान तेजस प्रदर्शन के दौरान क्रैश हो गया। इस दौरान विमान के हिमाचल प्रदेश के बहादुर pilot विंग कमांडर नमांश स्याल (34) शहीद हो गए। फिलहाल हम आपको बताते हैं कि आखिर एयर शो में एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए पायलट का सेलेक्शन कैसे होता है?
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एयर शो में दिखने वाला हर स्टंट और हाई-स्पीड फाइटर जेट का प्रदर्शन सिर्फ कौशल की बात नहीं है। इसके पीछे सैकड़ों घंटे का अनुभव, कड़ी ट्रेनिंग और सख्त चयन प्रक्रिया छुपी होती है। ऐसे पायलट कोई आम नहीं होते हैं। उनका चुनाव बेहद सावधानी से किया जाता है ताकि एयर शो के दौरान सुरक्षा और मनोरंजन दोनों सुनिश्चित हो सकें।
आमतौर पर ऐसे पायलटों के पास हजारों घंटे का उड़ान रिकॉर्ड होना जरूरी है। फाइटर जेट या स्टंट एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए विशेष सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि पायलट तेज गति, तेजी से बदलती परिस्थितियों और जोखिम भरे हालात में भी नियंत्रण बनाए रख सके। एक्सपर्ट बताते हैं कि सिर्फ घंटे भर की उड़ान या सामान्य विमान उड़ाना पर्याप्त नहीं होता।

एयर शो पायलट को हाई-स्पीड, कॉम्बैट और मैनुअवर उड़ानों का अनुभव होना चाहिए, जिससे वे भीड़ और स्टेज के आसपास सुरक्षित प्रदर्शन कर सकें। पायलटों का चयन कई परीक्षणों के आधार पर किया जाता है। इसमें शामिल हैं स्टंट उड़ान, प्रिसिजन फ्लाइंग और इमरजेंसी मैनेजमेंट। चयनित पायलटों को एयर शो के रूट और स्टंट रूट की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इसका उद्देश्य है कि हर प्रदर्शन न केवल दर्शकों के लिए रोमांचक हो बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी हो। पायलट की फिटनेस और मानसिक तैयारियों की जांच एयर शो से पहले की जाती है।
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