डेस्क। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था America इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसकी कूटनीतिक कोशिशें और आर्थिक बोझ दोनों ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। एक ओर पाकिस्तान में ईरान के साथ हुई उसकी शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई तो वहीं दूसरी ओर देश पर कर्ज का बोझा भारी होता जा रहा है।
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अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज अब 38 ट्रिलियन डॉलर के पार जा पहुंचा है।यह आंकड़ा कितना बड़ा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2025 में ही इसने 34 ट्रिलियन से 38 ट्रिलियन तक की छलांग लगा दी थी। कर्ज की यह रफ्तार अमेरिकी प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
अक्सर लोगों को लगता है कि अमेरिका केवल बाहरी देशों का कर्जदार है लेकिन हकीकत कुछ और है। कुल कर्ज का करीब तीन-चौथाई हिस्सा यानी 27 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खुद अमेरिका के भीतर ही लोगों और संस्थाओं का बकाया है। इसमें वहां का फेडरल रिजर्व, पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां शामिल हैं।अमेरिका ने अपने ही देश के लोगों की बचत और सरकारी ट्रस्टों से भारी मात्रा में उधार ले रखा है।

विदेशी देशों की बात करें तो अमेरिका पर उनका करीब 9 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। यह कुल कर्ज का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है। इस लिस्ट में जापान सबसे ऊपर बैठा है। जापान ने अमेरिका को करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज दे रखा है। इसके बाद नंबर आता है यूनाइटेड किंगडम का, जिसका अमेरिका पर 800 बिलियन डॉलर से ज्यादा का बकाया है। ये देश अपनी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी में निवेश करते हैं।
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