लखनऊ। भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी Amitabh Thakur को उत्तर प्रदेश की लखनऊ क्राइम ब्रांच ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है। वह लखनऊ सुपरफास्ट एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। अमिताभ ठाकुर को उनके खिलाफ चल रही धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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यह मामला वर्ष 1999 का है, जब ठाकुर देवरिया जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। अमिताभ पर आरोप है कि उनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जिला उद्योग केंद्र देवरिया के औद्योगिक प्लाट संख्या बी-2 का आवंटन अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर किया गया था, जिसमें उन्होंने जाली अभिलेख तैयार कर फर्जी नामों और पते का प्रयोग किया।

प्रकरण की शुरुआत तब हुई, जब संजय शर्मा नामक एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। संजय ने आरोप लगाया कि नूतन ठाकुर ने अपने और अपने पति के नाम व पते में परिवर्तन कर, झूठे दस्तावेजों के आधार पर औद्योगिक प्लाट आवंटित करवाया। इसके बाद इस प्लाट को लाभ कमाने के उद्देश्य से विक्रय कर दिया गया।
अमिताभ ठाकुर पर जिन धाराओं में मामला दर्ज उनमें कितनी सजा मिल सकती है, चलिए आपको बताते हैं? धारा 419; इसके तहत 3 वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों हो सकती है। धारा 420 के तहत 7 वर्ष तक की कैद और साथ में जुर्माना; आम तौर पर गंभीर आर्थिक अपराधों में लगती है। धारा 467 में आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माना लग सकता है जो काफी कठोर मानी जाती है। उन पर धारा 471, धारा 120बी भी लगाई गयी है। धारा 34 के तहत उन्हें खुद अलग से सजा नहीं मिलेगी।
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