लाइफस्टाइल डेस्क। वॉकिंग (Walking) एक ऐसी एक्सरसाइज है, जो फिट रहने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। इसलिए रोजाना वॉक करना सहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। लेकिन ऐसे में अक्सर यह सवाल आता है कि तेज वॉक करना ज्यादा फायदेमंद है या फिर स्लो वॉक?
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स्लो वॉक खासतौर से शुरुआत करने वालों, बुजुर्गों या जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों के लिए बेहतर माना जाता है। अगर आप एक्सरसाइज की दुनिया में नए हैं या लंबे अरसे बाद शुरू कर रहे हैं, तो स्लो वॉक एक बेहतरीन ऑप्शन है। यह शरीर पर जोर नहीं डालता और चोट का खतरा कम होता है। यह एक प्रकार का मेडिटेशन है जो तनाव और एंग्जाइटी को कम कर सकता है।

खाने के बाद की सैर, जैसे 10-15 मिनट की स्लो वॉक पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद करती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखती है। नियमित रूप से स्लो वॉक करने से धीरे-धीरे आपका स्टैमिना बढ़ता है, जिससे आप बाद में तेज चलने के लिए खुद को तैयार कर पाते हैं। तेज वॉक, वह गति है जहां आपकी हार्ट बीट तेज हो जाती है, सांस फूलने लगती है, लेकिन फिर भी आप बात कर पा रहे होते हैं।
तेज वॉक में आप स्लो वॉक की तुलना में लगभग दोगुनी कैलोरी बर्न करते हैं। यह वजन कम करने और वसा घटाने के लिहाज से ज्यादा असरदार है। दोनों के फायदों को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि एक दूसरे से बेहतर है। यह आपके व्यक्तिगत लक्ष्यों और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आपका लक्ष्य वजन घटाना, दिल को तंदुरुस्त रखना या फिटनेस लेवल बढ़ाना है, तो तेज वॉक ज्यादा फायदेमंद है।
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