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Tuesday, March 31, 2026

बंटवारे का झेला दर्द, फिर ऐसे खड़ा किया ₹300 से ₹7000 करोड़ का बिजनेस

नई दिल्ली। कई बिजनेसमैन ऐसे हैं, जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए। इनमें से एक हैं रजनी बेक्टर, जिनका परिवार कराची से भारत से आया। कराची में ही जन्मी रजनी की 17 वर्ष की आयु में लुधियाना के एक कारोबारी परिवार में शादी कर दी गयी। शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और जब उनके बच्चों का एडमिशन बोर्डिंग स्कूल में हुआ, तो उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में एक बेकरी कोर्स में दाखिला लिया।

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रजनी को अपने दोस्तों के बीच बेकिंग रेसिपी और आइसक्रीम के लिए काफी प्रशंसा मिलने लगी। इसी प्रशंसा से प्रेरणा लेकर उन्होंने महज 300 रुपये से एक छोटा-सा बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। 300 रुपये से उन्होंने एक ओवन खरीदा और अपने ही घर के आँगन में आइसक्रीम बनाई।

रजनी का आइसक्रीम बिजनेस (Business) चल तो रहा था, मगर मुनाफा नहीं हो पा रहा था। तब उनके पति, धर्मवीर ने सन 1978 में एक आइसक्रीम बनाने की यूनिट शुरू करने के लिए रजनी को 20,000 रुपये की आर्थिक मदद दी। रजनी ने अपने ब्रांड के लिए ‘क्रेमिका’ नाम चुना, क्योंकि यह सुनने में ‘क्रीम का’ (यानी क्रीम से बना हुआ) जैसा लगता था। रजनी ने शुरू में आइसक्रीम से प्रॉफिट कमाना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने अपने कारोबार को ब्रेड, बिस्किट और सॉस बनाने तक फैलाया।

आज रजनी का क्रेमिका ब्रांड भारत का दूसरा सबसे बड़ा बिस्किट निर्यातक है। इतना ही नहीं, इसके प्रोडक्ट 60 से अधिक देशों में उपलब्ध हैं। साथ ही कंपनी का वार्षिक टर्नओवर 1600 करोड़ रुपये से अधिक और टोटल वैल्यूएशन 7,000 करोड़ रुपये है। यानी जो सफर रजनी ने 300 रुपये से शुरू किया था, वो अब सालाना 7000 करोड़ रुपये में तब्दील हो गया है।

Tag: #nextindiatimes #Business #RajniBector

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