डेस्क। शुक्रवार देर शाम दिल्ली एनसीआर के कुछ हिस्सों में 5.9 तीव्रता का Earthquake आया। इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में था। इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर भूकंप किस स्तर पर पहुंचकर असल में नुकसान पहुंचाना शुरू करता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब।
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रिक्टर पैमाने पर 0 से 2.0 के बीच की तीव्रता वाले भूकंप इतने कमजोर होते हैं कि उन्हें आमतौर पर सिर्फ यंत्रों से ही मापा जा सकता है। थोड़ी ज्यादा तीव्रता यानि कि लगभग तीन की तीव्रता पर पहुंचने पर भी लोगों को हल्की कंपन महसूस हो सकती है।जब तीव्रता 4 से 4.9 के बीच पहुंच जाती है तो लोगों को झटके साफ तौर पर महसूस होने लगते हैं। खिड़कियों और दरवाजों के फ्रेम जैसी चीजें खड़खड़ा सकती हैं या अपनी जगह से हिल सकती हैं। हालांकि इतनी तीव्रता पर भी इमारतें आमतौर पर सुरक्षित रहती हैं।

3.5 से 5.9 का वह स्तर होता है जहां इमारतों को हल्का-फुल्का ढांचागत नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है। कमजोर दीवारों में दरारें आ सकती है और भारी फर्नीचर अपनी जगह से खिसक सकते हैं। जब भूकंप की तीव्रता 6 से ज्यादा हो जाती है तो वह खतरनाक बन जाता है। पुरानी या फिर कमजोर ढंग से बने इमारतों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसमें नींव में दरारें आना और ऊपरी मंजिलों का कमजोर पड़ जाना शामिल है।
7 से 7.9 के बीच की तीव्रता वाले भूकंप बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। इमारतें ढह सकती हैं, सड़कें फट सकती हैं और पाइपलाइन जैसे जरूरी बुनियादी ढांचे खराब हो सकते हैं। हालांकि नुकसान की सीमा सिर्फ भूकंप की तीव्रता से ही तय नहीं होती।
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