हेल्थ डेस्क। जब हम Metabolism की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान वजन बढ़ने पर जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेटाबॉलिज्म धीमा होने का असर आपकी त्वचा पर भी दिखाई देता है। जी हां, अगर आपका मेटाबॉलिज्म स्लो हो गया है, तो वजन बढ़ने या एनर्जी की कमी महसूस होने से पहले आपकी त्वचा में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
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बता दें कि धीमा मेटाबॉलिज्म शरीर में सेल्स रिजेनरेट करने की प्रक्रिया को सुस्त कर देता है, जिससे त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगती है। जब मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, तो त्वचा रूखी महसूस होने लगती है। ज्यादा ड्राईनेस के कारण त्वचा बेजान और पपड़ीदार दिखने लगती है। मेटाबॉलिक रेट कम होने से शरीर में वॉटर रिटेंशन बढ़ जाता है, जिससे सुबह सोकर उठने पर चेहरा और आंखें सूजी हुई दिखाई दे सकती हैं।

मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर शरीर में कोलेजन का प्रोडक्शन कम हो जाता है। इसकी कमी से चेहरे पर फाइन लाइन्स और झुर्रियां जल्दी आने लगती हैं। धीमा मेटाबॉलिज्म शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। ये टॉक्सिन्स रक्त में जमा होकर मुहांसों और पिगमेंटेशन का कारण बनते हैं।
अगर आपकी त्वचा पर कोई छोटी-सी चोट या दाना ठीक होने में सामान्य से ज्यादा समय ले रहा है, तो यह सेलुलर रिपेयर की धीमी गति का संकेत है। मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के लिए अपनी डाइट में अंडे, दालें, पनीर, चिकन आदि को शामिल करें। डिहाइड्रेशन मेटाबॉलिज्म को तुरंत सुस्त कर देता है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। गुनगुना पानी पीना और भी फायदेमंद हो सकता है। ज्यादा स्ट्रेस से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है। इसलिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
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