हेल्थ डेस्क। जब कोई वायरस हमारे शरीर पर हमला करता है तो हमारा शरीर उससे लड़ने के लिए ‘एंटीबॉडी’ तैयार करता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि वायरस से लड़ने की यह क्षमता आपकी उम्र के हिसाब से बदल सकती है? जी हां, एक नए शोध से पता चला है कि किसी भी वायरस के प्रति हमारे शरीर की प्रतिक्रिया (immunity) और एंटीबॉडी के बनने में हमारी उम्र एक बहुत ही प्रमुख कारक होती है।
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शोध में पाया गया कि जब एक ही प्रकार का वायरस अलग-अलग लोगों पर हमला करता है, तो हर व्यक्ति का शरीर उस वायरस के अलग-अलग हिस्सों को निशाना बनाने वाले एंटीबॉडी उत्पन्न कर सकता है। खास बात यह है कि किसी विशेष वायरस के लिए कुछ एंटीबॉडी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ते हैं, जबकि कुछ उम्र के साथ घट भी जाते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस के किस खास हिस्से पर निशाना साधा जा रहा है।

उम्र के अलावा व्यक्ति का लिंग, उसके जेनेटिक्स और जन्म का स्थान भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सभी कारक मिलकर न सिर्फ यह तय करते हैं कि शरीर में कितनी मात्रा में एंटीबॉडी बनेंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करते हैं कि वे एंटीबॉडी वायरस के किन विशिष्ट हिस्सों को अपना निशाना बनाएंगे।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में यह स्पष्ट किया है कि उम्र, लिंग और जन्म स्थान का सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि एंटीबॉडी किस ‘एपिटोप’ को लक्षित करेंगे। आसान भाषा में समझें तो, एपिटोप किसी वायरस या एंटीजन का वह खास हिस्सा होता है, जहां जाकर हमारी एंटीबॉडी जुड़ जाती है और अपना काम शुरू करती है। इस शोध को ‘नेचर इम्यूनोलॉजी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
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