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Tuesday, February 17, 2026

FIR और NCR में क्या होता है अंतर, किस रिपोर्ट में होती है तुरंत कार्यवाही?

डेस्क। पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दो तरीके से दर्ज की जाती है। जब भी किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है, तो पुलिस सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति की बात सुनती है और मामले की गंभीरता के आधार पर ही तय करती है कि आरोपी पर FIR दर्ज करनी है या NCR।

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हालांकि आमतौर पर बहुत ही कम लोग ही एनसीआर के बारे में जानते हैं। इसलिए आज इस लेख के जरिये हम आपको FIR यानी (फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) और NCR (नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट) के बीच में अंतर बताएंगे। एफआईआर केवल संज्ञय यानी गंभीर मामले के आरोप में ही दर्ज की जाती है। एफआईआर में पुलिस के पास बगैर किसी वारंट के आरोपी को आरेस्ट करने का अधिकार होता है, जबकि एनसीआर गैर-संज्ञेय यानी मामूली अपराध के खिलाफ दर्ज की जाती है।

एनसीआर दर्ज करते वक्त पुलिस को किसी व्यक्ति को अरेस्ट करने से पहले कोर्ट की इजाजत लेना अनिवार्य होता है। एफआईआर दर्ज होने के बाद तुरंत इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दी जाती है। पुलिस आरोपी को बगैर किसी वारंट के गिरफ्तार भी कर सकती है। NCR में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं होता है।

जब किसी व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज की जाती है, तो यह मामला कोर्ट तक पहुंचता है, जबकि एनसीआर में ज्यादातर मामले पुलिस द्वारा खुद ही सुलझा लिए जाते हैं। आरोपी के खिलाफ कब कौन-सी रिपोर्ट दर्ज करनी है। यह मामले की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति ने हत्या, बलात्कार, डकैती, किडनैपिंग या पोस्को एक्ट के तहत जुर्म किया है, तो पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज की जाती है। एनसीआर में गैर-संज्ञेय अपराध जैसे पारिवारिक लड़ाई, मामूली मारपीट, दस्तावेज या सामान का खो जाने पर एनसीआर दर्ज की जाती है।

Tag: #nextindiatimes #FIR #NCR

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