हेल्थ डेस्क। कैंसर (Cancer) एक बेहद गंभीर बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजहों में कैंसर भी शामिल है। भारत में लगभग 14.1 लाख नए मामले सामने आए और 9.2 लाख मौतें दर्ज की गईं। इसकी सबसे बड़ी वजह है समय रहते इस बीमारी का पता न चलना।
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मेडिकल साइंस में भले ही काफी प्रगति हो चुकी है लेकिन आज भी ज्यादातर मरीजों को कैंसर के बारे में एंडवांस स्टेज यानी तीसरे या चौथे स्टेज पर ही चलता है। आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि कैंसर के निदान और मरीज के बचने की संभावना के बीच गहरी खाई है।
कैंसर के शुरुआती लक्षण, जैसे- हल्का दर्द, खांसी, वजन कम होना या अपच बहुत सामान्य होते हैं। लोग अक्सर इन्हें छोटी समस्या समझकर घरेलू नुस्खों या साधारण दवाओं से ठीक करने की कोशिश करते हैं, जिससे कीमती समय निकल जाता है। जांच की प्रक्रिया मुश्किल होना और रेफरल सिस्टम में होने वाली देरी भी एक कारण है। कई बार प्राथमिक केंद्रों पर सही जांच नहीं हो पाती। इसके अलावा, जांच का भारी खर्च और एक्सपर्ट्स तक पहुंच की कमी भी मरीजों को समय पर इलाज लेने से रोकती है।

आज भी समाज में कैंसर को एक डेथ वॉरंट के रूप में देखा जाता है। इंटरनेट या नीम-हकीमों के चक्कर में पड़कर लोग सही इलाज के बजाय वैकल्पिक उपचारों में समय बर्बाद कर देते हैं, जिससे कैंसर को बढ़ने का मौका मिल जाता है। इसलिए कैंसर के बेहतर और सफल इलाज के लिए शुरुआती स्टेज में पहचान, जागरूकता, बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग, तेज जांच प्रक्रिया और खर्च में कमी जरूरी है, क्योंकि समय पर पकड़ा गया कैंसर अक्सर ठीक हो सकता है।
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