नई दिल्ली। भारत का संविधान लोकतंत्र की नींव है। 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया और उसी दिन भारत एक संप्रभु गणराज्य बना। यही वजह है कि हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है। लेकिन संविधान की असली प्रति कहां रखी है और उसे सदियों तक सुरक्षित रखने के लिए क्या खास इंतजाम किए गए हैं? आईये जानते हैं।
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भारतीय Constitution अपनी लंबाई, विस्तार और विविधता के कारण अलग पहचान रखता है। इसे मशहूर कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से इटैलिक शैली में लिखा था। इस ऐतिहासिक काम के लिए उन्होंने कोई मेहनताना नहीं लिया बल्कि सिर्फ इतना चाहा कि उनके दादा का नाम संविधान में दर्ज हो।
भारतीय संविधान की मूल प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मौजूद हैं। ये दोनों प्रतियां नई दिल्ली स्थित संसद भवन के पुस्तकालय में एक विशेष रूप से तैयार किए गए कक्ष में रखी गई हैं। यह आम लाइब्रेरी नहीं, बल्कि अत्यधिक सुरक्षा और नियंत्रित वातावरण वाला स्थान है। यहां बिना अनुमति पहुंच संभव नहीं है।

संविधान की मूल प्रति कुल 251 पन्नों की है। ये सभी पन्ने पार्चमेंट यानी चर्मपत्र पर लिखे गए हैं, जो सामान्य कागज से ज्यादा टिकाऊ होता है। संविधान की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती रही है। कागज और स्याही समय के साथ खराब हो सकते हैं, खासकर नमी और ऑक्सीजन की मौजूदगी में। इसी खतरे से बचाने के लिए संविधान की मूल प्रतियों को हीलियम गैस से भरे खास पारदर्शी बॉक्स में रखा गया है। हीलियम एक इनर्ट गैस है, जो किसी रासायनिक प्रतिक्रिया में हिस्सा नहीं लेती है। इससे ऑक्सीजन बाहर रहती है और फंगस, बैक्टीरिया या कीड़ों का खतरा खत्म हो जाता है।
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