स्पोर्ट्स डेस्क। कहते हैं हालात चाहे जैसे हों, अगर हौसला जिंदा हो तो रास्ता जरूर निकलता है। ऐसी ही कहानी है दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी (Lungi Ngidi) की। आज जिनका नाम दुनिया भर में लिया जा रहा है, उनका बचपन बेहद कठिन हालातों में गुजरा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन सपने मजबूत थे। शुरुआत में वह बल्लेबाज बनना चाहते थे, मगर हालात ने उनकी दिशा ही बदल दी।
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लुंगी एनगिडी की मां दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर परिवार चलाती थीं। पिता एक स्कूल में रखरखाव का काम करते थे। घर की आमदनी इतनी नहीं थी कि बेटे के लिए बल्ला खरीदा जा सके। यही मजबूरी उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बनी। जब बल्लेबाजी का सपना अधूरा रह गया, तब उन्होंने गेंद को हथियार बनाया और तेज गेंदबाज बनने का फैसला किया।

बल्लेबाजी छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन लुंगी ने हालात से हार नहीं मानी। उन्होंने मेहनत को अपनी ताकत बनाया। अभ्यास के दौरान उनकी रफ्तार और सटीकता ने सबका ध्यान खींचा। धीरे धीरे उनका नाम स्थानीय क्रिकेट में पहचाना जाने लगा। जिस बच्चे के पास बल्ला खरीदने के पैसे नहीं थे, वही बच्चा अपनी गेंदों से बड़े बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने लगा।
सात जनवरी को खेले गए मुकाबले में लुंगी एनगिडी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो अब तक कोई नहीं कर सका था। उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर तीन बल्लेबाजों को आउट कर हैट्रिक पूरी की। यह इस प्रतियोगिता के इतिहास की पहली हैट्रिक थी। उस एक ओवर ने न सिर्फ मैच का रुख बदला, बल्कि लुंगी का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। संघर्षों से निकले लुंगी एनगिडी आज दुनिया की बड़ी लीगों में खेलते नजर आते हैं।
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