एंटरटेनमेंट डेस्क। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में जब भी मधुरता, संतुलन और गहरी भावनाओं की बात होती है, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है- Wolfgang Amadeus Mozart। उन्हें दुनिया का महान शास्त्रीय संगीतकार और बाल प्रतिभा माना जाता है। मोजार्ट का जन्म 27 जनवरी 1756 को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में हुआ था।
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उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना सीखते हैं, उस 3 वर्ष की आयु में मोजार्ट हार्पसिकोर्ड बजाने में निपुण हो गए थे। मात्र 5 वर्ष की उम्र तक आते-आते वे की-बोर्ड और वायलिन बजाने के साथ-साथ खुद की संगीत रचनाएं भी करने लगे थे। उनकी याददाश्त इतनी तेज थी कि वे बिना किसी गलती के लंबे म्यूजिक पीस याद रख लेते थे।

इसी छोटी-सी उम्र में उन्होंने यूरोप के राजघरानों के सामने अपनी शानदार प्रस्तुति देकर सबको दंग कर दिया था। मोजार्ट के शुरुआती और एकमात्र शिक्षक उनके पिता लियोपोल्ड मोजार्ट थे, जो खुद एक मशहूर वायलिन वादक थे। लियोपोल्ड ने न केवल उन्हें संगीत सिखाया, बल्कि अन्य भाषाएं और शैक्षणिक विषयों का ज्ञान भी दिया। मोजार्ट को नई चीजें सीखने का काफी शौक था।
अपने पिता के साथ यूरोप और इटली की यात्राओं के दौरान उनकी मुलाकात कई महान संगीतकारों से हुई। लंदन में उनकी मुलाकात योहान क्रिस्तियान बाख से हुई, जिनका मोजार्ट के संगीत पर गहरा असर पड़ा। 17 वर्ष की उम्र में उनकी नियुक्ति साल्जबर्ग के दरबार में हुई, लेकिन बेहतर अवसरों की तलाश में उन्होंने निरंतर यात्राएं जारी रखीं। उनकी रचनाएं इतनी प्रभावशाली थीं कि महान संगीतकार बीथोवन भी उनसे प्रेरित थे और मोजार्ट को अपना आइडल मानते थे। 5 दिसंबर 1791 को इन्होंने अंतिम सांस ली।
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