नई दिल्ली। हर साल देश का बजट पेश किया जाता है। आगामी बजट 1 फरवरी 2026 (Budget 2026) को पेश किया जा सकता है। देश का बजट एक सालाना फाइनेंशियल स्टेटमेंट होता है, जो सरकार की अनुमानित आय (राजस्व) और व्यय (खर्च) का ब्यौरा होता है, जो बताता है कि सरकार पैसा कहाँ से कमाएगी और कहाँ खर्च करेगी।
यह भी पढ़ें-देश में पहली बार कब हुआ था SIR, जानें क्यों होता है ये जरूरी?
बजट देश के आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संसाधनों के आवंटन और नीतियों के निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है। बजट को सरकार का वित्तीय खाका कहा जा सकता है, जो बताता है कि एक वित्तीय वर्ष (जैसे भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च) में सरकार कितना राजस्व जुटाएगी और उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और अन्य योजनाओं पर कैसे खर्च करेगी।

यह कई कारणों से बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। बजट के जरिए ही गरीबी, बेरोजगारी और आय असमानता को कम करने के लिए योजनाएँ बनाई जाती हैं और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाकर और गरीबों को सब्सिडी देकर आय का रिडिस्ट्रीब्यूशन किया जाता है। बजट संसद में पेश करके सरकार अपनी योजनाओं और खर्चों के बारे में पारदर्शिता दिखाती है और जनता के प्रति जवाबदेह बनती है।
इसके जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, निवेश को प्रोत्साहित किया जाता है और महंगाई को नियंत्रित किया जाता, जिससे अर्थव्यवस्था संतुलित रहती है। इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रीज में निवेश से नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। ये काम भी बजट के जरिए किया जाता है। बजट ही सरकार की आर्थिक नीतियों को दर्शाता है और भविष्य के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करता है।
Tag: #nextindiatimes #Budget2026 #NirmalaSeetaraman




