लाइफस्टाइल डेस्क। महफिल सजी हो, गिलास हाथ में हो और सब एक साथ बोल उठें चीयर्स। यह दृश्य आज आम है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जाम टकराने से पहले यही शब्द क्यों कहा जाता है? इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि चीयर्स सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है।
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इतिहासकारों के अनुसार cheers शब्द फ्रेंच भाषा के पुराने शब्द chiere से निकला है, जिसका मतलब चेहरा या भाव होता था। 18वीं शताब्दी तक आते-आते यह शब्द खुशी जताने या किसी का हौसला बढ़ाने के अर्थ में इस्तेमाल होने लगा। धीरे-धीरे यह सामाजिक समारोहों और दावतों का हिस्सा बन गया। हालांकि चीयर्स को आस्था से भी जोड़ा जाता है।

चीयर्स से जुड़ी एक लोकप्रिय कहानी मध्यकालीन यूरोप से आती है। उस दौर में जहर देकर हत्या करना आम साजिशों में शामिल था। इसलिए जब लोग साथ बैठकर शराब पीते थे, तो गिलास आपस में जोर से टकराते थे। माना जाता था कि गिलास टकराने से थोड़ी-सी शराब एक-दूसरे के प्यालों में मिल जाती है। इससे यह भरोसा बनता था कि अगर किसी एक गिलास में जहर है, तो वह सबमें बराबर बंट जाएगा और कोई एक व्यक्ति निशाना नहीं बनेगा।
एक और मान्यता मध्ययुगीन अंधविश्वासों से जुड़ी है। उस समय लोग मानते थे कि बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां इंसानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। गिलास टकराने की आवाज तेज होती थी। माना जाता था कि इस आवाज से बुरी आत्माएं दूर भागती हैं। कुछ जगहों पर लोग जाम टकराने के बाद थोड़ा-सा पेय जमीन पर भी गिरा देते थे, ताकि वह हिस्सा आत्माओं के लिए अर्पित माना जाए और पीने वाले सुरक्षित रहें।
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