नई दिल्ली। बिहार में हुए चुनाव के दौरान stock market में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दरअसल शेयर बाजार राजनीतिक स्थिरता की तलाश में रहता है। हर चुनावी मौसम में बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर चुनाव का शेयर बाजार पर इतना गहरा असर क्यों पड़ता है?
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चुनावों का शेयर बाजार पर असर पड़ने की एक सबसे बड़ी वजह है नीतिगत अनिश्चितता। हर राजनीतिक दल अपने साथ एक अलग आर्थिक एजेंडा लेकर आता है। इससे बुनियादी ढांचे, टैक्सेशन, मैन्युफैक्चरिंग और व्यापार जैसे क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है। निवेशक यह देखने के लिए काफी बारीकी से नजर रखते हैं कि कौन सी नीतियां आने वाले सालों को आकार देंगी।

शेयर बाजार पूर्वानुमान और स्थिरता पर ही चलते हैं। निवेशक साफ तौर से बहुमत वाली सरकार को पसंद करते हैं क्योंकि यह सुसंगत पॉलिसी और सुचारू निर्णय को सुनिश्चित करती है। जब चुनाव एक मजबूत स्थिर सरकार का संकेत देते हैं तब विश्वास बढ़ता है और विदेशी निवेशक निवेश बढ़ाते हैं। इससे बाजार में तेजी आती है। एक अनिश्चित विधानसभा या फिर अस्थिर गठबंधन पॉलिसी पैरालिसिस की आशंकाओं को जन्म दे सकता है। ऐसे में बाजार में नर्मी आ सकती है।
चुनाव के दौरान शेयर मार्केट सिर्फ अर्थशास्त्र से ही नहीं बल्कि भावनाओं और अटकलें से भी प्रेरित होता है। चुनाव नतीजे से पहले के दिनों में निवेशक एग्जिट पोल और राजनीतिक भविष्यवाणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं। यदि शुरुआत में रुझान किसी ऐसी सरकार के पक्ष में होते हैं जिसे व्यापार हितैषी माना जाता है तो बाजार ऊपर चढ़ते हैं। चुनाव के दौरान फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स अक्सर वेट एंड वॉच का दृष्टिकोण अपनाते हैं और परिणाम घोषित होने तक निवेश कम करते हैं।
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