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Monday, March 31, 2025

जजों पर कौन करता है कानूनी कार्रवाई? यशवंत वर्मा के नोटकांड के बाद उठी चर्चा

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा (Yashwant Verma) के आवास से कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी का मामला चर्चा में हैं। सोमवार को जस्टिस वर्मा (Yashwant Verma) को अगले आदेश तक के लिए न्यायायिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। वहीं सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन भी कर दिया गया है।

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दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट (High Court) के जज यशवंत वर्मा (Yashwant Verma) के घर नोटों का जखीरा मिलने के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया था। अब ऐसे यह सवाल आता है कि अगर कोई जज दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कौन करता है। साथ ही उन्हें पद से हटाए जाने को लेकर क्या नियम हैं?

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज के खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) में निर्धारित की गई है। वहीं संविधान का अनुच्छेद 218 के अनुसार यह प्रावधान है हाईकोर्ट के जज पर भी लागू होता है। अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, किसी जज को संसद की ओर से तय प्रक्रिया के जरिए किसी जज को उसके पद से उसके प्रमाणित कदाचार और अक्षमता के आधार पर हटाया जाता है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए महाभियोग का आधार और प्रक्रिया का स्तर काफी हाई होता है।

हाई कोर्ट (High Court) के जजों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से संसद को है। यदि संसद को लगता है कि किसी जज ने गंभीर अनियमितताएं की हैं, तो उस जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। यह प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है। प्रस्ताव को पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसके बाद एक जांच समिति गठित की जाती है, जिसमें उच्चतम न्यायालय का एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक कानूनी विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

यह समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है। यदि समिति आरोपों को सही मानती है तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा होती है और दोनों सदनों द्वारा पारित किया जाता है। अगर जांच रिपोर्ट में जज पर लगाया गया आरोप सही साबित होता है तो संबंधित सदन जांच समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करता है। इसके बाद दोनों सदनों की ओर से राष्ट्रपति से आरोपी जज को हटाने की सिफारिश की जाती है।

Tag: #nextindiatimes #YashwantVerma #HighCourt

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