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Friday, January 30, 2026

UGC से पहले कौन देता था यूनिवर्सिटी को मान्यता, अंग्रेजों के समय क्या थी व्यवस्था?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने UGC विनियमों पर रोक लगा दी है। उन्हें स्थगित भी कर द‍िया गया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है क‍ि यूजीसी विनियम 2012 अगले आदेश तक लागू रहेंगे। बीते द‍िनों हुई सुनवाई के बाद ये न‍िर्देश द‍िया गया है। अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी ने Equity in Higher Education Institutions Regulations जारी किए थे।

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भारत में शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे यून‍िवर्सिटीज पुराने समय में दुनिया भर में काफी फेमस थे। यहां चीन, कोरिया, तिब्बत, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से छात्र पढ़ने के ल‍िए आया करते थे। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान एजुकेशन को नए तरीके से ढाला गया।

शायद ही क‍िसी को मालूम होगा क‍ि यूजीसी का विचार आजादी से पहले ही सामने आ चुका था। साल 1944 में भारत के लिए एक खास एजुकेशन सिस्टम बनाने की तैयारी शुरू की गई थी। उस समय सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने शिक्षा को लेकर एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सार्जेंट रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। इस रिपोर्ट में पहली बार University Grants Committee बनाने की सिफारिश की गई।

यूजीसी बनने से पहले, विश्वविद्यालयों की मान्यता और निगरानी सीधे केंद्रीय सरकार (शिक्षा मंत्रालय) और कुछ मामलों में पूर्ववर्ती समितियों के माध्यम से की जाती थी। सार्जेंट रिपोर्ट के आधार पर 1945 में University Grants Committee का गठन किया गया। शुरुआत में इसका काम सिर्फ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी तक ही सीम‍ित था, लेक‍िन 1947 में आजादी के बाद इसकी जिम्मेदारी बढ़ा दी गई और इसे देश की सभी यूनिवर्सिटीज से जुड़े मामलों की निगरानी का काम सौंपा गया।

Tag: #nextindiatimes #UGC #SupremeCourt

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