नई दिल्ली। केंद्रीय Budget 2026-27 को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। 2017 से हर साल 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाता रहा है। 2026 में 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इसके बावजूद भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उसी दिन बजट पेश कर सकती है। चलिए जानते हैं कि देश का बजट असल में कौन तैयार करता है और प्रक्रिया क्या होती है?
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औपचारिक बजट बनाने की प्रक्रिया सितंबर अक्टूबर के आसपास शुरू होती है। वित्त मंत्रालय सभी केंद्रीय मंत्रालय, विभागों और यहां तक की राज्य सरकारों को एक सर्कुलर जारी करता है। इसमें उनसे आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए खर्च का अनुमान और वित्तीय जरूरतों को जमा करने के लिए कहा जाता है। ये अनुमान बजट ढांचे की नींव बनाते हैं। प्रस्ताव मिलने के बाद वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उनकी सावधानीपूर्वक समीक्षा करते हैं।

इसके बाद वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक परामर्श होता है। इस बैठक में बैंकिंग, उद्योग, कृषि, ट्रेड यूनियन और अर्थशास्त्री को आमंत्रित किया जाता है। परामर्श के बाद वित्त मंत्रालय राजस्व अनुमान, खर्च की सीमा और हर विभाग के लिए आवंटन को अंतिम रूप देता है। यह फैसले राजकोषीय अनुशासन, आर्थिक प्राथमिकता और विकास के लक्ष्यों से तय होते हैं। फिर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की जाती है।
बजट दस्तावेजों की छपाई से पहले नॉर्थ ब्लॉक में एक पारंपरिक हलवा समारोह आयोजित किया जाता है। यह बजट बनाने के आखिरी और सबसे सीक्रेट फेज की शुरुआत है। इसके बाद बजट बनाने और प्रिंट करने में शामिल अधिकारियों का बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म कर दिया जाता है। इसके बाद वित्त मंत्री लोकसभा में केंद्रीय बजट को पेश करते हैं।
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