लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर तबादला एक्सप्रेस तेज रफ्तार से दौड़ी है। योगी सरकार ने मार्च 2026 के आखिरी दिनों में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल दी हैं। जब भी इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के ट्रांसफर होते हैं, तो आम जनता के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर IAS-IPS का ट्रांसफर कौन कर सकता है?
यह भी पढ़ें-भारत में कहां बनती है ब्रह्मोस मिसाइलें, पढ़ें इसकी खासियतें
उत्तर प्रदेश में आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के तबादले (Transfer) का अंतिम अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है। यह प्रक्रिया राज्य के गृह विभाग (IPS के लिए) और नियुक्ति/सामान्य प्रशासन विभाग (IAS के लिए) के माध्यम से, मुख्य सचिव की सिफारिश पर की जाती है।
IAS का ट्रांसफर ‘नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग’ और IPS का ‘गृह विभाग’ संभालता है।मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति तबादलों की सूची तैयार करती है। IAS अधिकारी जिस सरकार के लिए काम करते हैं, उसे सस्पेंड करने का अधिकार भी उसी सरकार के पास होता है। संविधान के अनुच्छेद 311(2) के अनुसार, अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसकी रैंक कम की जा सकती है। साथ ही उसकी नौकरी भी खत्म की जा सकती है।

बता दें कि राज्य सरकार के पास IAS अधिकारी को सस्पेंड करने का अधिकार तो है लेकिन नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। अगर राज्य सरकार किसी IAS को सस्पेंड करती है तो उन्हें 48 घंटे के अंदर कैडर कंट्रोल अथॉरिटी को लेटर भेजकर इसकी जानकारी देनी होती है। इसके अलावा उन्हें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) का प्रभार संभाल रहे मंत्री की मंजूरी लेनी होती है। किसी IAS, IRS या IFS अधिकारी को नौकरी से निकालने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है।
Tag: #nextindiatimes #IAS #IPS




