महाराष्ट्र। महाराष्ट्र सरकार ने धर्मांतरण को लेकर एक नया विधेयक (Anti Conversion Law) पेश किया है, जिसे धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 कहा जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराया जाता है और बाद में उस दंपत्ति का बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो उसकी मां का विवाह से पहले था।
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भारत में कई राज्य ऐसे हैं जहां पहले से ही जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून लागू हैं। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।उत्तर प्रदेश में इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे 14 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

यूपी के इस कानून के तहत अगर पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो तो सजा और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में आरोपी को 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। खास बात यह है कि इन मामलों को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
राजस्थान में भी राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 का मसौदा तैयार किया गया है। इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति जबरन, धोखे से या शादी के जरिए किसी का धर्म बदलवाता है तो उसे 7 से 14 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। ऐसे मामलों में 10-20 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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