डेस्क। अमेरिका और Iran के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच एक चौंकाने वाला कूटनीतिक बदलाव सामने आ रहा है। दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक मंच पर लगातार अकेला पाते जा रहे हैं। हाल ही में इजरायल ने भी अमेरिका को एक बड़ा झटका दे दिया है। इजरायल ने यह साफ कह दिया है कि ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उनकी सेना ईरान नहीं जाएगी।
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बता दें नाटो के प्रमुख सहयोगी जिनमें जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम भी शामिल हैं, युद्ध के प्रयासों में शामिल होने से साफ इनकार कर चुके हैं। उनका ध्यान तनाव बढ़ाने के बजाय क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने पर केंद्रित है। खास तौर से फ्रांस ने अतिरिक्त सैनिक भेजने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों ने भी नौसेना भेजने या फिर सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए अमेरिका के दबाव का विरोध किया है। वहीं इटली ने अमेरिका की खुले तौर पर आलोचना की है और उसके नेतृत्व ने इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है। इसी बीच न्यूजीलैंड ने अमेरिका की लीडरशिप वाली पहलों में भाग लेने से इनकार कर दिया है।
उधर रूस ने एक व्यापक रणनीति साझेदारी के जरिए ईरान के साथ अपने संबंधों को और गहरा किया है। रूस कथित तौर पर ईरान को एडवांस्ड रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति भी कर रहा है।चीन ईरान का सबसे बड़ा आर्थिक समर्थक बना हुआ है। वह ईरान के तेल का एक बड़ा हिस्सा खरीदता है। अगर उत्तर कोरिया की बात करें तो यह भी सैन्य और तकनीकी सहयोग के जरिए ईरान के साथ जुड़ा हुआ है।
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