नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने Aravalli Hills की इकोलॉजिकल स्थिति पर बहस को शुरू कर दिया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 100 मीटर से कम ऊंची पहाड़ियों को अपने आप जंगल के रूप में क्लासिफाई नहीं किया जा सकता। अगर आसान शब्दों में कहें तो अब 100 मीटर से ज्यादा ऊंची चोटियों को ही अरावली माना जाएगा।
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समुद्र तल से 1722 मीटर की ऊंचाई पर बसा गुरु शिखर राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू के पास है। यह अरावली पर्वत श्रृंखला का सबसे ऊंचा स्थान है, जो दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वत प्रणालियों में से एक है। यह उपाधि कर्नल जेम्स टॉड से जुड़ी हुई है। इन्होंने सबसे पहले इस शिखर को संतों की चोटी कहा था। दरअसल अपने सफर के दौरान टॉड ने देखा कि संत और तपस्वी अक्सर शिखर के आसपास के एकांत वातावरण में रहते और ध्यान करते थे।

यहां की शांति, ऊंचाई और स्वच्छ हवा इसे आध्यात्मिक साधना के लिए एकदम सही जगह बनाती थी। इसकी एक और वजह यह रही है कि यहां इस बात का विश्वास है कि गुरु दत्तात्रेय, जिन्हें गुरुओं के गुरु के रूप में भी पूजा जाता है यहां पर तपस्या करते थे। शिखर पर एक गुफा मंदिर में उनके पद चिन्ह माने जाने वाले निशान भी हैं।
शिखर पर गुरु दत्तात्रेय का एक प्राचीन गुफा मंदिर है। इसी के साथ पास में उनकी माता अनुसूपा का मंदिर है। लगभग दो अरब साल पुरानी माने जाने वाली यह अरावली रेंज दिल्ली से हरियाणा और राजस्थान होते हुए गुजरात तक 670 से 800 किलोमीटर तक फैली हुई है। अपनी उम्र के अलावा यह पहाड़ियां पर्यावरण में भी एक जरूरी भूमिका निभाती है।
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