एजुकेशन डेस्क। हाल ही में केंद्र सरकार ने तीनों ऑल इंडिया सर्विसेज के लिए एक नई केडर एलोकेशन पॉलिसी को शुरू किया है। इससे ऑफिसर्स को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैसे असाइन किया जाता है इसमें कुछ जरूरी बदलाव आए हैं। इसी बीच आइए जानते हैं कि कैसे तय होता है ऑफिसर्स का कैडर सिस्टम?
यह भी पढ़ें-संसद में क्यों उठा किताबों का विवाद, निशिकांत दुबे कौनसी किताबें लेकर पहुंचे?
एक IAS या फिर आईपीएस ऑफिसर का कैडर मुख्य रूप से तीन बातों से तय होता है। यूपीएससी रैंक, कैंडिडेट की पसंद और अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी की उपलब्धता। केंद्र ऑफिसर्स को यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए भर्ती करता है और उन्हें उन राज्य कैडर में एलोकेट किया जाता है जहां वे अपने करियर का ज्यादातर समय बिताते हैं।

नई पॉलिसी के तहत वैकेंसी की गिनती संबंधित साल की 1 जनवरी से की जाती है। इसमें राज्यों में कैडर वाइज जरूरत को ध्यान में रखा जाता है। सबसे बड़े बदलाव में से एक है पहले के 5 जोन सिस्टम की जगह अल्फाबेटिकल ग्रुपिंग सिस्टम लाना। भारत के 25 कैडर अब चार ग्रुप में बंटे हुए हैं। कैंडिडेट्स को पहले अपना पसंदीदा ग्रुप बताना होगा और उस ग्रुप में अपने पसंदीदा राज्यों को क्रम से लिस्ट करना होगा।
एलोकेशन एक साइकिल सिस्टम का इस्तेमाल करके किया जाता है, जहां पर रैंक 25 के बैच में देखे जाते हैं। हर साइकिल में एक समय में सिर्फ एक ऑफिसर को एक खास कैडर में एलोकेशन किया जाता है। इससे यह पक्का होता है कि कोई एक राज्य टॉप रैंक पर मोनोपॉली ना करे और टैलेंट पूरे देश में बराबर बंटे। आईएएस ऑफिसर्स के लिए कैडर डिपार्मेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग द्वारा एलोकेशन किया जाता है। आईपीएस अधिकारियों के लिए जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की होती है।
Tag: #nextindiatimes #IAS #IPS




