डेस्क। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच अभी भी जंग जारी है। इस जंग का असर ईंधन आपूर्ति पर काफी ज्यादा पड़ रहा है। हालांकि आज के समय में अमेरिका पेट्रोलियम भंडार में काफी सक्षम है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पूरे अमेरिका (US) में ईंधन की कमी आ गई थी। यह घटना है 1973 की।
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1973 में सऊदी अरब और दूसरे अरब तेल उत्पादक देशों के एक बड़े भू राजनीतिक कदम ने रातों-रात वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल दिया था। योम किप्पुर युद्ध के दौरान इन देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर तेल प्रतिबंध लगा दिया था। इससे आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक की शुरुआत हुई थी।
इसकी मुख्य वजह युद्ध के दौरान इजरायल को अमेरिका का समर्थन था। जब मिस्र और सीरिया ने इजरायल पर हमला किया तब अमेरिका ने सैन्य सहायता देकर हस्तक्षेप किया था। इसके जवाब में अरब देशों ने वाशिंगटन पर अपनी मिडल ईस्ट नीति बदलने का दबाव डालने के लिए तेल को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया।

सऊदी अरब के राजा फैसल की लीडरशिप में ओपीईसी के अरब सदस्यों ने ना सिर्फ अमेरिका का तेल एक्सपोर्ट रोक दिया बल्कि हर महीने उत्पादन में 5% की कटौती भी कर दी। इस कदम का उद्देश्य सप्लाई में ऐसा झटका देना था जिससे पश्चिमी देश इजरायल पर अपने रुख पर दोबारा से विचार करने के लिए मजबूर हो जाएं। इसका प्रभाव तत्काल रूप से पड़ा। कच्चे तेल की कीमतें लगभग $3 प्रति बैरल से बढ़कर 1974 तक लगभग $12 हो गई। इस अचानक उछाल ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी। इस वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कड़ी चोट पड़ी।
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