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Wednesday, January 7, 2026

BJP और RSS में क्या है अंतर, यहां जानिए दोनों का इतिहास

नई दिल्ली। BJP और RSS के बीच संबंध भारत में लंबे समय से राजनीतिक बहस और लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है। इस मुद्दे पर सीधे बात करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में यह साफ किया है कि सिर्फ भाजपा की गतिविधियों के जरिए आरएसएस को समझने की कोशिश करना एक बड़ी गलती होगी। आइए जानते हैं कि आरएसएस और भाजपा कैसे अलग हैं?

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संघ को आप दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ भी कह सकते हैं, जो बिना किसी सरकारी मदद के जब-जब भारत पर कोई खतरा मंडराया तब उसके स्वयंसेवकों ने अपनी सेवा, त्याग और समर्पण की मिसाल पेश की। बीते सौ सालों में संघ एक वट वृक्ष बनकर उभरा है, जिसकी अनगिनत शाखाएं और संगठन देश की सेवा में लगे हैं। संघ की सबसे बड़ी ताकत उसके करोड़ों स्वयंसेवक हैं। संघ की लाखों शाखाएं आज दुनिया भर में सुबह-शाम लगती हैं। बच्चों के लिए बाल शाखा, तरुण शाखा और प्रौढ़ शाखाओं का आयोजन होता है।

यही स्वयंसेवक जब चुनाव में जब जमीन पर उतर कर काम करते हैं तो माना जाता है कि भगवा पार्टी के पक्ष में माहौल खड़ा हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना (1980) से पहले पूर्व यानी जनसंघ के जमाने से विचारधारा के आधार पर RSS इस दक्षिणपंथी राजनीतिक दल का समर्थन करता आया है।

बीजेपी के कई बड़े नेता, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और अनगिनत कार्यकर्ता और पदाधिकारी संघ से जुड़े रहे हैं। संघ की विचारधारा और दिशा-निर्देश भाजपा की नीतियों और कार्यों में अहम भूमिका निभाती हैं। दोनों संगठनों के बीच तालमेल से ही बीजेपी की रणनीतियां बनती हैं।

Tag: #nextindiatimes #RSS #BJP #MOHANBHAGWAT

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