डेस्क। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मृत्यु के कारण राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक (State Mourning) घोषित किया गया है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि राजकीय शोक क्या होता है और इस दौरान किन नियमों का पालन किया जाता है?
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राजकीय शोक का मतलब है सरकार के जरिए किसी प्रमुख व्यक्ति के निधन पर आधिकारिक रूप से शोक प्रकट करना, यह शोक पूरे देश या किसी एक राज्य तक सीमित हो सकता है। आमतौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर पूरे देश में राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या राज्य की किसी बड़ी और सम्मानित हस्ती के निधन पर राज्य स्तर पर राजकीय शोक घोषित किया जाता है।

राजकीय शोक के दौरान कुछ खास नियम फॉलो करने होते हैं, जैसे शोक की अवधि के दौरान कोई उत्सव नहीं मनाना। इस अवधि के दौरान सरकारी स्कूल, कालेज और दफ्तर या सरकारी समारोह में सांस्कृतिक प्रोग्राम भी आयोजित नहीं होते हैं। राजकीय शोक के दौरान फ्लैग कोड ऑफ इंडिया नियम के मुताबिक विधानसभा, सचिवालय सहित महत्वपूर्ण कार्यालयों में लगे राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं।
गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय त्योहार के मौके पर कोई राजकीय शोक नहीं मनाया जाता है। भारत सरकार के 1997 के नियमों के अनुसार, राजकीय शोक के दौरान सार्वजनिक छुट्टी जरूरी नहीं होती है। छुट्टी सिर्फ तभी घोषित की जाती है, जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का निधन पद पर रहते हुए होता है। राज्य सरकारें चाहें तो अपने स्तर पर स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी घोषित कर सकती हैं। यह पूरी तरह राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर करता है।
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