डेस्क। अमेरिका और भारत में रसोई गैस के इस्तेमाल का तरीका पूरी तरह अलग है। भारत में हम हर महीने सिलेंडर बदलने पर निर्भर हैं, वहीं अमेरिका में लोग अपने घर के बाहर लगे बड़े टैंकों को रिफिल करवाते हैं। अमेरिका में एलपीजी (LPG) को आमतौर पर प्रोपेन के नाम से जाना जाता है।
यह भी पढ़ें-LPG उपभोक्ता जल्दी से कर लें ये काम, नहीं तो कट जाएगा गैस कनेक्शन
भारत में जहां शहरों में पाइपलाइन (PNG) और बाकी जगह सिलेंडरों का जाल बिछा है, वहीं अमेरिका के बड़े शहरों में ज्यादातर घरों में प्राकृतिक गैस की पाइपलाइन सीधी पहुंचती है लेकिन अमेरिका के ग्रामीण इलाकों और उपनगरों (Suburbs) में आज भी प्रोपेन गैस का ही इस्तेमाल होता है।
वहां का सिस्टम भारत से काफी अलग और थोड़ा हाई-टेक है। भारत में हम 14.2 किलो के सिलेंडर का उपयोग करते हैं लेकिन अमेरिका में घरों के बाहर एक बहुत बड़ा फिक्स्ड टैंक लगा होता है। यह टैंक घर के आंगन या पिछवाड़े में जमीन के ऊपर या नीचे स्थापित होता है। इसकी क्षमता हमारे छोटे सिलेंडर से कई गुना ज्यादा होती है। वहां गैस की डिलीवरी ‘सिलेंडर बदलने’ के रूप में नहीं होती, बल्कि एक बड़ा टैंकर ट्रक आपके घर आता है और पाइप के जरिए आपके बाहर रखे टैंक को रिफिल कर देता है।

अमेरिका में गैस खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ता है। वहां की कंपनियां ग्राहकों के टैंक में सेंसर लगाती हैं या उनके इस्तेमाल के पैटर्न को ट्रैक करती हैं। जैसे ही टैंक में गैस का स्तर एक निश्चित पॉइंट से नीचे जाता है, कंपनी को अपने आप सूचना मिल जाती है। इसके बाद डिलीवरी ट्रक बिना बुलाए आता है और टैंक भरकर चला जाता है। वहां यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड सर्विस की तरह काम करता है।
Tag: #nextindiatimes #LPG #America #LPGCylinder




