लखनऊ। उत्तर प्रदेश के CM Yogi का सिंगापुर और जापान का चार दिवसीय विदेश दौरा पूरा हो गया है। इस दौरान बड़े निवेश समझौते साइन हुए हैं। सरकार का दावा है कि इससे लाखों रोजगार बनेंगे। सरकार के मुताबिक, इस यात्रा में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए। अब सवाल उठता है कि आखिर इस दौरे का खर्चा किसने उठाया?
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मुख्यमंत्री के विदेश दौरे का खर्च किस सरकार द्वारा उठाया जाएगा, इसे लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। नियम के अनुसार अगर दौरा राज्य के हित में और राज्य सरकार के कार्यक्रम के तहत होता है, तो उसका खर्च राज्य सरकार उठाती है। अगर किसी मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार किसी विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम या आधिकारिक प्रतिनिधित्व के लिए विदेश भेजती है तो उस स्थिति में खर्च केंद्र सरकार के मद से किया जाता है।

इस मामले में मुख्यमंत्री का दौरा उत्तर प्रदेश में निवेश लाने और राज्य से जुड़े कार्यक्रमों के लिए था, इसलिए इस यात्रा का खर्च उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। विदेश दौरों का सीधा मकसद निवेश और रोजगार बढ़ाना होता है। सरकार का दावा है कि इस दौरे से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
हालांकि एमओयू साइन होने और निवेश जमीन पर उतरने के बीच समय लगता है। आम जनता के लिए अहम बात यह है कि घोषित निवेश प्रस्ताव कितनी जल्दी और किस स्तर पर लागू होते हैं। दौरे का खर्च राज्य सरकार के बजट से होता है, इसलिए यह अप्रत्यक्ष रूप से राज्य के संसाधनों से जुड़ा मामला है। ऐसे में जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि निवेश और रोजगार के दावों का वास्तविक असर क्या होता है।
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