एंटरटेनमेंट डेस्क। गीता दत्त का 23 नवंबर 1930 को हुआ था हालांकि सिर्फ 41 की उम्र में ही 1972 को उनका निधन हो गया। लेकिन जिंदगी के इन सालों में उन्होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में कई उतार चढ़ाव देखे। वे एक बेहतरीन प्लेबैक singer थीं उन्हें हिंदी सिनेमा और बंगाली सिनेमा में एक ऊंचा दर्जा मिला था।
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उनकी आवाज इतनी मधुर थी कि लता मंगेशकर भी गीता की फैन थीं। गीता दत्त ने तुमी जे अमार, ये लो मैं हारी पिया, जाने कहां मेरा जिगर गया जी, बाबूजी धीरे चलना, ठंडी हवा काली घटा, ए दिल मुझे बता दे जैसे गानों को अपनी आवाज दी है। गीता की गुरु दत्त (Guru Dutt) से मुलाकात फिल्म बाजी की शूटिंग के दौरान हुई और उन्हें उनकी सुरीली आवाज से प्यार हो गया। वह भी खुद को उनके प्यार में पड़ने से नहीं रोक पाईं।

शादी से पहले उन्होंने तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया। हालांकि गीता का परिवार इस रिश्ते के बिल्कुल खिलाफ था क्योंकि वह परिवार की कमाने वाली थी, फिर भी दोनों ने विरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया और शादी कर ली। दोनों की प्रोफेशनल लाइफ तो बहुत अच्छी थी, लेकिन उनकी पर्सनल लाइफ वैसी नहीं चली। कपल के तीन प्यारे बच्चे हुए, तरुण दत्त, अरुण दत्त और नीना दत्त।
हालांकि, यह शादी कामयाब नहीं रही और आखिरकार कपल अलग हो गए। गुरु दत्त की टूटी शादी के कई कारण थे, लेकिन वहीदा रहमान के साथ उनके रोमांटिक रिश्ते ने इसमें आखिरी कील ठोक दी। ऐसा माना गया कि वहीदा रहमान से गुरु दत्त की बढ़ती नजदीकियों ने इस शादी का अंत किया। गुरु दत्त के प्यार में गीता नशे की वजह से ही जिंदगी से हार गईं।
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