नई दिल्ली। भारत में राष्ट्रगान जन गण मन और राष्ट्रीय गीत Vande Mataram दोनों को संविधान के अनुसार समान सम्मान प्राप्त है लेकिन व्यवहार में इन दोनों के लिए बनाए गए नियमों और कानूनों में बड़ा फर्क है। जहां राष्ट्रगान के लिए सख्त प्रोटोकॉल और सजा का प्रावधान है, वहीं वंदे मातरम के लिए अभी तक कोई स्पष्ट कानूनी नियम तय नहीं किए गए हैं। अब केंद्र सरकार इस अंतर को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रही है।
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वर्तमान कानून के अनुसार, राष्ट्रगान के दौरान खड़ा होना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान का अपमान करता है, गाने में बाधा डालता है या सम्मान नहीं करता तो उस पर राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगान के गायन और वादन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हुए हैं।

हालांकि संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की बात कही थी, लेकिन आज तक इसके लिए कोई जरूरी शिष्टाचार, शारीरिक मुद्रा या दंडात्मक कानून तय नहीं किया गया है। साल 2022 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वंदे मातरम के लिए कोई कानूनी सजा तय नहीं है। इसे गाने या न गाने को लेकर कोई बाध्यकारी निर्देश नहीं हैं।
इसी वजह से कई बार अदालतों में याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें मांग की गई कि वंदे मातरम के लिए भी राष्ट्रगान जैसा स्पष्ट ढांचा तैयार किया जाए। सरकार का मानना है कि इस गीत को फिर से वही गौरव और सम्मान मिलना चाहिए।
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