डेस्क। Iran की राजनीति में इब्राहिम रईसी का नाम एक ऐसे अध्याय की तरह है, जिसे दुनिया कभी कठोर नेता तो कभी तेहरान के कसाई के रूप में याद करती है। एक साधारण परिवार से निकलकर सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले रईसी का सफर जितना प्रभावशाली रहा, उतना ही विवादों के साये में भी घिरा रहा।
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1988 के सामूहिक नरसंहार से लेकर राष्ट्रपति पद की शपथ लेने तक, रईसी ने ईरान की कट्टरपंथी विचारधारा को मजबूती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इब्राहिम रईसी के जीवन का सबसे काला पन्ना साल 1988 में लिखा गया। उस समय वे तेहरान के डिप्टी प्रॉसिक्यूटर थे। ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में, तत्कालीन सुप्रीम लीडर रुहोल्ला खोमैनी ने एक गुप्त फतवा जारी किया था।

इसके तहत एक विशेष पैनल बनाया गया जिसे ‘डेथ कमीशन’ कहा जाता है। रईसी इस चार सदस्यीय पैनल के सबसे युवा सदस्य थे, जिसका काम राजनीतिक कैदियों की वफादारी की जांच करना और सजा तय करना था।इस समयअवधि में राजनीतिक कैदियों को फांसी देने का सिलसिला चला, जिसमें एक अनुमान के मुताबिक करीब 3000 से ज्यादा राजनीतिक विरोधियों को फांसी दी गई। मारे गए लोगों में अधिकांश लोग ईरान के पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन के समर्थक थे। इसी कारण रईसी को ‘तेहरान का कसाई’ कहा जाता था।
रईसी की छवि ईरान के भीतर एक बेहद कट्टरपंथी नेता की थी। साल 2021 में वे ईरान के राष्ट्रपति चुने गए। उनके कार्यकाल के दौरान ईरान ने पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों में काफी सख्ती दिखाई। 19 मई 2024 को ईरान-अजरबैजान सीमा के पास एक बेहद खराब मौसम में उनका हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें उनकी और उनके विदेश मंत्री सहित कई अन्य अधिकारियों की मौत हो गई।
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