एंटरटेनमेंट डेस्क। स्क्रीन पर चाहे कॉमेडी हो या गंभीर रोल, Kader Khan ऐसे एक्टर थे जो आंखों से अदायगी करते थे। उनके चेहरे के एक्सप्रेशन में इतनी ताकत होती थी कि डायलॉग बोलने की जरूरत ही नहीं होती थी लेकिन जब वो बोलते थे तो किरदार जीवंत हो उठता था।
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300 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले और 250 से ज्यादा फिल्मों में डायलॉग लिखने वाले कादर एक गरीब परिवार से थे, जिन्हें ये नहीं पता होता था कि सुबह के बाद शाम का खाना मिलेगा या नहीं। उनका परिवार अफगानिस्तान में रहता था और जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहा था, लेकिन कादर के जन्म के बाद वो मुंबई आ गए।

दरअसल कादर खान से पहले उनके तीन भाई थे, जिनकी मौत 8 साल की उम्र होने तक हो चुकी थी। इसके बाद एक्टर के जन्म के बाद उनकी मां के मन में डर बैठ गया था कि वो उन्हें भी खो देंगी। ऐसे में वो उन्हें मुंबई ले आईं। कहते हैं कि बचपन में कादर खान की अम्मी जब उन्हें नमाज के लिए मस्जिद भेजती थीं तो वह मस्जिद न जाकर कब्रिस्तान चले जाते थे। मुफलिसी ऐसी कि पहनने के लिए चप्पल भी नसीब नहीं होता था। कादर की मां उनके गंदे पैर देखकर समझ जाती थीं कि वह मस्जिद नहीं गए हैं।
कादर खान कब्रिस्तान में बैठकर डायलॉग्स लिखा करते थे और बोला करते थे, जिसे सुनकर ही उन्हें पहली बार नाटक में काम करने का मौका मिला था। एक्टर ने छोटी सी उम्र से ही अपने परिवार को सहारा देना शुरू कर दिया था। हालांकि एक्टर की मां की दी गई हिम्मत और भरोसे की वजह से ही वो पढ़-लिखकर कादर खान बने।
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