डेस्क। हमारे Constitution में भले ही बुजुर्गों के लिए कोई अलग परिभाषा न हो, लेकिन इसमें कुछ ऐसे विशेष प्रावधान जरूर हैं, जो उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने की ताकत देते हैं। आज इस आर्टिकल में आप संविधान के उन 4 खास अनुच्छेदों के बारे में जानेंगे जो वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा, न्याय और सम्मान की गारंटी देते हैं।
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अनुच्छेद 41: यह राज्यों को निर्देश देता है कि वे वृद्धावस्था, बीमारी या किसी प्रकार की निशक्तता की स्थिति में बुजुर्गों की सहायता करें। सरकार द्वारा दी जाने वाली ‘वृद्धावस्था पेंशन’ और ‘राष्ट्रीय सामाजिक सहायता’ जैसी योजनाएं इसी अनुच्छेद की भावना से चलाई जाती हैं।
अनुच्छेद 21: यह हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन और शारीरिक सुरक्षा का अधिकार देता है। अगर किसी बुजुर्ग को उनके घर से बेदखल किया जाता है या उन्हें बुनियादी इलाज (मेडिकल सुविधा) नहीं दी जाती है, तो इसे अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन माना जाता है।

Article 14: इस अनुच्छेद के तहत, बुजुर्गों के साथ किसी भी तरह का मनमाना या बिना कारण भेदभाव करना ‘असंवैधानिक’ है। अगर किसी सरकारी काम या प्रक्रिया में उनके साथ भेदभाव होता है, तो वे विभागीय शिकायत कर सकते हैं या कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
अनुच्छेद 39A: अनुच्छेद 39A राज्य को यह जिम्मेदारी देता है कि वह सभी के लिए समान न्याय सुनिश्चित करें। बुढ़ापा या बीमारी जैसी स्थिति में न्याय पाना मुश्किल न हो, इसके लिए राज्य का दायित्व है कि वह बुजुर्गों को मदद पहुंचाए। इस अनुच्छेद के तहत बुजुर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता और सलाह पाने का अधिकार है। सस्ता और आसानी से न्याय दिलाने के लिए ‘जिला विधिक सेवा प्राधिकरण’ जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं, जहां वरिष्ठ नागरिक संपर्क कर सकते हैं।
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