डेस्क। Israel-Iran war ने ग्लोबल इकॉनमी में बड़ी रूकावटों को पैदा कर दिया है। जहां युद्ध में सीधे तौर पर शामिल देश मिलिट्री ऑपरेशन और डिफेंस सिस्टम पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, वहीं इस संकट से अचानक कई दूसरे देशों और इंडस्ट्रीज को फायदा हुआ है। तेल की बढ़ती कीमत, हथियारों की बढ़ती डिमांड और एनर्जी सप्लाई के बदलते रास्तों ने लड़ाई के मैदान से दूर कुछ देशों के लिए आर्थिक मौके पैदा किए हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक रूस को इस जंग का सबसे बड़ा फायदा हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है। जैसे-जैसे मिडल ईस्ट में तनाव बढ़ा कच्चे तेल की कीमतें 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं। रूस दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी एक्सपोर्टर्स में से एक है और इस कीमत में बढ़ोतरी से काफी फायदा उठा रहा है।

मिडिल ईस्ट के सप्लाई रूट में रूकावटों की वजह से भारत और चीन जैसे बड़े तेल खरीदारों ने रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदा है। इस बदलाव से मॉस्को का एनर्जी रेवेन्यू बढ़ा है। रूस के लिए एक और स्ट्रैटेजिक फायदा यह है कि दुनिया का ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध से हट गया है। इससे मॉस्को पर इंटरनेशनल दबाव कम हुआ है।
यूनाइटेड स्टेट्स में सबसे ज्यादा फायदा डिफेंस ठेकेदारों को हुआ है। उनके शेयर हथियारों और मिलट्री इक्विपमेंट की बढ़ती डिमांड की वजह से बढ़ें हैं। युद्ध ने अमेरिकी एनर्जी एक्सपोर्ट, खासकर लिक्विफाइड नेचुरल गैस को भी काफी ज्यादा बढ़ावा दिया है। जैसे-जैसे यूरोप रूसी गैस के विकल्प ढूंढ रहा है, यूनाइटेड स्टेट्स लिक्विफाइड नेचुरल गैस शिपमेंट की डिमांड बढ़ी है। इससे अमेरिकी एनर्जी कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ा है।
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